ग्वालियर के ऋषि कुमार शुक्ला सीबीआई के नए डायरेक्टर

Sun 03-Feb-2019 12:21 pm
23 अगस्त 1960 को ग्वालियर में हुआ था जन्म; परिवार के कई सदस्य अभी रहते हैं शहर में

ग्वालियर। मध्यप्रदेश कैडर के 1983 बैच के आईपीएस ऋषिकुमार शुक्ला को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का प्रमुख बनाया गया है। वे अगस्त 2020 में सेवानिवृत्त होंगे। शुक्ला मध्यप्रदेश कैडर के पहले पुलिस अफसर हैं जिन्हें सीबीआई डायरेक्टर के रूप में पदस्थापना मिली है। कमलनाथ के हटाने के पांच दिन बाद पीएम मोदी ने बनाया सीबीआई डायरेक्टर ही बना दिया| अधीनस्थों में लोकप्रिय पूर्व डीजीपी और मप्र पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के अध्यक्ष शुक्ला खुफिया जांच एजेंसी इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) में लंबे समय रह चुके हैं।

सीबीआई के डायरेक्टर बनाए गए आईपीएस अधिकारी ऋषि कुमार शुक्ला का ग्वालियर से गहरा नाता है। यहां लाला का बाजार में उनका पुश्तैनी मकान है। 23 अगस्त 1960 को जन्मे श्री शुक्ला के पिता बालकृष्ण शुक्ला एमपीईबी में इंजीनियर थे। दादा रामेश्वर शास्त्री जाने-माने आयुर्वेदाचार्य थे।

उन्होंने एलकेजी और यूकेजी की पढ़ाई यहां कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में की। इसके बाद पिताजी हिंदुस्तान मोटर्स में महाप्रबंधक होकर कोलकाता चले गए तो उन्हें भी साथ जाना पड़ा। पुश्तैनी घर में अब उनके चाचा गोविंद माधव शुक्ला व मुकुल शुक्ला, चाची शारदा व चचेरे भाई श्रीनिवास (बॉबी) शुक्ला रहते हैं। जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला उनकी चचेरी बहन हैं। बड़ी बहन डॉ. श्रमिता पांडे भी ग्वालियर में रहती हैं।

आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएशन किया और 1983 में यूपीएससी की परीक्षा दी। पहले ही प्रयास में आईपीएस के रूप में चयन हो गया। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्हें 1 जुलाई 2016 को मध्य प्रदेश का डीजीपी बनाया गया था।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पांच दिन पहले ही में उन्हें इस पद से हटाकर पुलिस हाउसिंग बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था।

गृहमंत्री से हुआ मतभेद
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जुलाई 2016 में शुक्ला को डीजीपी नियुक्त किया। करीब ढाई साल के कार्यकाल में कई बार शुक्ला का गृहमंत्री से मतभेद रहा। बात संभालने के लिए खुद मुख्यमंत्री को दखल देना पड़ा। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले स्वास्थ्य कारणों से शुक्ला छह हफ्ते के अवकाश पर चले गए थे। इस दौरान उनकी बाईपास सर्जरी हुई। चुनाव के बाद उन्होंने दोबारा कामकाज संभाला।